आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि पंडित गोविंद बल्लभ पंथ कौन थे? इनका भारत की आज़ादी में क्या महत्वपूर्ण योगदान था? इनकी ही कोशिश की वजह से हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा मिला।

हम आगे जानेंगे कि इनका भारत की आज़ादी में किस तरह योगदान रहा। इन्हे आधुनिक भारत का आर्किटेक्ट कहा जाता है। इन्हे भारत के सबसे उच्च पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा गया था। 

पंडित गोविंद बल्लभ पंत

पंडित गोविंद बल्लभ पंत कौन थे? जीवन परिचय –

पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के खूंट इलाके में हुआ था। इनका जन्म कुमाऊनी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम गोविंदी बाई तथा इनके पिता का नाम मनोरथ पंत था जो की पेशे से सरकारी दफ़्तर में कार्यरत थे।

इन्होंने अपनी शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की तथा पढ़ाई के साथ ही वकालत भी शुरू कर दी थी। यह उत्तराखण्ड के प्रमुख राजनीतिक नेता थे। और इन्हे पांचवा गृह मंत्री की उपाधि दी गई थी। और 1961 में Cerebral Stroke की वजह से इनकी मृत्यु हो गई थी।

1914 में इन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ काम करना शुरू कर दिया था। इन्होंने एक लोकल परिषद की मदद करके उन्हें कुली बेगर जैसे चुनौतीपूर्ण कानून से आज़ादी दिलवाई। इस कानून के अन्तर्गत गांव वालो को अपने नंबर के हिसाब से ब्रिटिश ऑफिसर्स के भारी भरकम सामान का आवागमन तथा उनकी यात्रा को मुफ्त करवाना होता था। इससे बहुत से लोगो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता थे। और इस कानून को हटवाने में सफलता हासिल की।

पंडित गोविंद बल्लभ पंथ की राजनीतिक हिस्सेदारी –

1921 में इन्होंने राजनीति में पहला कदम रखा। और इन्हे कांग्रेस पार्टी ने अपना वकील नियुक्त किया तथा इन्हे रामप्रसाद बिस्मिल तथा अशफाकुल्लाह खान का केस अदालत में लड़ना था। रामप्रसाद बिस्मिल तथा अशफाकुल्लाह खान काकोरी केस में शामिल थे जो 1920 में घटित हुआ था। 

1930 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत को नमक आंदोलन में हिस्सा लेने पर गिरफ्तार कर लिया गया तथा कई हफ्तों तक जेल में रखा। नमक आंदोलन गांधी जी द्वारा शुरू किया गया था। इसके बाद provincial congress की बैठक में हिस्सा लेने पर उन्हें 7 महीने तक जेल में कैद रखा था। Provincial congress पर तब प्रतिबंध लगा हुआ था।

  • 1934 में पंत जी को केंद्रीय विधान सभा में चुन लिया गया।
  • 1934–1939 तक इन्हे यूनाइटेड province (अब उत्तराखण्ड) का मुख्यमंत्री चुन लिया गया।
  • 1940 में पंत जी को सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने पर गिरफ्तार कर लिया गया।
  • 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने पर इन्हे गिरफ्तार कर लिया गया और अहमदाबाद फोर्ट में इन्हे 3 साल तक कैद रखा।
  • 1946–1950 तक एक बार फिर से पंत जी को united province(अब उत्तराखण्ड) का मुख्यमंत्री चुना गया।
  • 1950–1954 तक इन्हे उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया।
  • 1955–1961 के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में इन्हे गृह मंत्री चुना गया।

पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा तथा कुछ राज्यो की राज्यभाषा बनवाने के लिए पूरी कोशिश की। इनके इस योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

अपने गृह मंत्री के कार्यकाल के दौरान 1957 को इन्हे भारत के सबसे उच्च पुरस्कार भरत रत्न से नवाजा गया।

1960 में पंत जी को heart attack आने की वजह से तबियत में सुधार आना मुश्किल हो गया और अंतता 1961 में cerebral स्ट्रोक की वजह से ग्रह मंत्रालय में अपने ही ऑफिस में इनकी मृत्यु हो गई। इन्होंने अपनी अंतिम सांस 7 मार्च 1961 को ली।

पंडित गोविंद बल्लभ पंत से जुड़े जरुरी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न – पंडित गोविन्द बल्लभ पंत कौन थे ?

उत्तर – भारत रत्न  प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी 

प्रश्न – गोविन्द बल्लभ पंत का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर – ग्राम खूंट, अल्मोड़ा जिला

प्रश्न – गोविन्द बल्लभ पंत को भारत रत्न कब मिला?

उत्तर – सन 1957 में

प्रश्न – गोविन्द बल्लभ पंत के पिता का नाम क्या था?

उत्तर – मनोरथ पंत

प्रश्न – अंगूर की बेटी किसकी रचना है?

उत्तर – गोविंद बल्लभ पंत

प्रश्न – गोविन्द बल्लभ पंत सागर कृत्रिम झील कहाँ है?

उत्तर – सोनभद्र, उत्तर प्रदेश, भारत

प्रश्न – गोविंद सागर झील का निर्माण कब हुआ?

उत्तर – सन् 1952 में 

प्रश्न – पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म कब हुआ ?

उत्तर – 10 सितंबर 1887

प्रश्न – 10 सितंबर को किस स्वतंत्रता सेनानी की जयंती मनाई जाती है ?

उत्तर – पंडित गोविंद बल्लभ पंत

प्रश्न – पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती कब मनाई जाती है ?

उत्तर – 10 सितंबर

प्रश्न – गोविंद बल्लभ पंत ने राजनीति में पहला कदम कब रखा?

उत्तर – 1921 में

प्रश्न – गोविंद बल्लभ पंत ने कहाँ से शिक्षा प्राप्त की ?

उत्तर – इलाहाबाद विश्वविद्यालय

प्रश्न – पंडित गोविंद बल्लभ पंत की मृत्यु कब हुयी?

उत्तर – 7 मार्च 1961 (उम्र 73)


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