OBC बिल 2021 क्या है?, फायदे, नुकसान, संशोधन, लोकसभा बिल पास लिस्ट,  आरक्षण,  सुप्रीम कोर्ट OBC बिल फैसला , (127th Constitutional Amendment Bill Kya hai,  Loksabha, Details, Benefits, Side Effects, OBC Bill pass date, OBC Bill List, OBC Bill Status in Hindi)

आज के आर्टिकल में हम जानेंगे की OBC Bill 2021 क्या है? (OBC Reservation Amendment Bill Passed) यह बिल संविधान का 127वां संसोधन है।

इस बिल के अन्तर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग को 50 फीसदी के कोटे की सीमा को खत्म कर दिया गया और सामाजिक तथा आर्थिक आधार पर सूची बनाने का अधिकार फिर से राज्य की सरकारों को दे दिया गया।

ओबीसी बिल की खास बात यह है कि इस बिल का संसद में किसी ने विरोध नहीं किया। पूरे सदन ने इसका एकमत स्वागत किया।

कोई भी राजनीतिक पार्टी ओबीसी वर्ग को नाराज़ नहीं करना चाहेगी, एक यह भी वजह रही की इस बिल का विरोध करने की कोई हिम्मत नहीं जुटा सका। इस बिल का विरोध करने का सीधा मतलब ओबीसी वर्ग से पंगा लेना था।

आरक्षण हमारे देश के लिए हमारे लिए एक बड़ा मुद्दा रहा है। अखबारों में आपने आरक्षण के मुद्दे को लेकर तना-तनी के बारे में जरूर पढ़ा होगा क्यूंकि राज्य को 50 फीसदी से अधिक आरक्षण देने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

आगे हम जानेंगे की 50 फीसदी से अधिक आरक्षण सीमा की जरूरत क्यूं पड़ी और राज्य सरकार को दोबारा से सूची बनाने का अधिकार देने से क्या लाभ होगा। 

OBC बिल 2021 क्या है?

OBC आरक्षण बिल 2021 –

बिल का नाम ओबीसी आरक्षण बिल (OBC Reservation Amendment Bill )
बिल पास दिनांक 4 अगस्त 2021
बिल पास सदन लोकसभा
बिल पास किया गया केंद्रीय कैबिनेट के द्वारा
बिल का लाभ राज्य सरकार को OBC सूची बनाने का मिलेगा पूरा अधिकार

OBC बिल 2021 क्या है? (OBC Reservation Amendment Bill Passed), आरक्षण, संशोधन

देश के किसी ना किसी हिस्से में आरक्षण को लेकर आन्दोलन तथा सरकार से तनातनी चलती रहती है। यह 127वां संविधान संशोधन 10 अगस्त 2021 को पारित हुआ।

इस बिल का संसद में किसी भी विपक्षी दल ने विरोध नही किया और कुल 386 मत इसके पक्ष में पड़े। इस बिल के अंतर्गत सरकार के पास ओबीसी आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से बढ़ाने का अधिकार मिल गया है और राज्य सरकार समाजिक तथा आर्थिक आधार पर ओबीसी वर्ग की सूची को बना सकती है।

हमारे देश में आरक्षण को लेकर तनातनी तथा विभिन्न दलों के विरोध के बाद सरकार 30 वर्ष पुराने कानून पर संसद में चर्चा करने को तैयार हो गई। पुराने कानून के अन्तर्गत ओबीसी आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से किसी भी हालात में बढ़ाया नही जा सकता था.

तथा ओबीसी वर्ग की सूची बनाने का अधिकार भी केंद्र सरकार के पास था। और भी अधिक जानने के लिए पहले हमें मंडल कमीशन के बारे में जानना बहुत जरूरी है। यह कमेटी समाजिक तथा आर्थिक आधार पर पिछड़े लोगो को पहचानने की थी।

मंडल कमीशन क्या है ?

यह कमेटी सामाजिक तथा आर्थिक आधार पर पिछड़े लोगो को पहचानने के लिए 1979 में जनता पार्टी के द्वारा B.P. मंडल की अध्यक्षता में गठित की गई थी तब मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री थे।

यह समाजिक तथा आर्थिक आधार पर पिछड़े वर्ग (SEBC– Socially and Economically Backward classes commission) के लिए कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने 1980 में अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि देश में 3743 पिछड़े हुए वर्ग मौजूद है। जो कि देश की जनसंख्या का 52 प्रतिशत आबादी थी।

कमेटी ने 27 प्रतिशत आरक्षण अन्य पिछड़ा वर्ग को सरकारी नौकरी तथा प्राइवेट सेक्टर में देने की सलाह दी,  जो की अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति को मिलाकर 50 प्रतिशत आरक्षण हुआ।

कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा देने पर सुप्रीम कोर्ट की मनाही थी जिसमे अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण देना पर सुप्रीम कोर्ट की मनाही थी।

मंडल कमीशन से प्रेरित होकर सरकार के द्वारा कुछ और कमेटियों को गठित किया गया जो की पिछड़े वर्ग के वर्गो के लिए गठित हुई।

  • राम नंदन कमेटी– इस कमेटी ने 1993 में अपनी एक रिपोर्ट जमा की जिसमे अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में से क्रीमी लेयर को चुना गया था। और राम नंदन कमेटी की यह रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।
  • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग– यह कमेटी 1993 में संसद के द्वारा बनाई गईं तथा 2018 में इसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुए जो की संविधान का 102वां संशोधन है। इसके अन्तर्गत आरक्षण को लेकर शिकायतों का ब्यौरा करना था।

इसके बाद 2018 में 102वां संशोधन अधिनियम पारित हुआ जिसमे एनसीबीसी का बहुत योगदान रहा।

इस संशोधन के तहत आर्टिकल 338B तथा 342A को जोड़ा गया–

  • समाजिक तथा आर्थिक आधार पर पिछड़े वर्गो की सूची का जिम्मा केंद्र सरकार को दे दिया गया, और इस पर राष्ट्रपति की आखिरी मौहर होगी।
  • इस संशोधन ने राज्यों से पिछड़ा वर्ग की सूची जारी करने की ताकत छीन ली गई।
  • इस संशोधन से पहले केंद्र सरकार obc की सूची बनाने में कोई दखलंदाजी नहीं करती थी। समाजिक तथा आर्थिक आधार पर वर्गो को विभाजित करने का ज़िम्मा राज्य की सरकारो पर था।

इस संशोधन ने आरक्षण आन्दोलन को और भी तेज कर दिया तथा विरोधी पार्टियां भी इसका जबरदस्त विरोधी कर रही थी।

105वां संविधान संशोधन बिल 2021 –

संसद में 127वां संशोधन बिल आया और इस पर चर्चा हुई इस बिल पर गर्मा गर्मी जरूर हुई लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी ने इसका विरोध नही किया और कुल 386 मत के साथ 11 अगस्त 2021 को इसे 127वें संविधान संशोधन विधेयक 2021 के रूप में पारित किया था।  यह 105वां संविधान संशोधन विधेयक पारित हो गया। इस बिल के अन्तर्गत निम्न बदलाव किए गए–

  • इस विधेयक से राज्यों को फिर से पिछड़ी जाति को समाजिक यथा आर्थिक आधार पर पहचानने यथा उनकी सूची बनाने का जिम्मा मिल गया।
  • आर्टिकल 342A (clause 1 and clause 2), और अब इसमें एक क्लॉज को और जोड़ दीया गया 342A(clause 3) इसमें राज्यों की सूची मेंटेन करना है।
  • अब राज्य सीधे SEBC(समाजिक तथा आर्थिक आधार पर पिछड़े वर्ग) को निर्देशित कर सकती है, अब सीबीसी (नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज़) को रेफर करने की आवश्यकता नहीं है।
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया की 671 जातियों को इस संशोधन की वजह से फ़ायदा होगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस विधेयक से ओबीसी के लोगों को काफी लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार महान समाज सुधारकों पेरियार, ज्योतिबा फुले, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय आदि द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे व्यक्ति का उत्थान नहीं होता है तो विकास अधूरा है।

OBC बिल के फ़ायदे –

  • OBC बिल के संशोधन को मान्यता मिलने के बाद अब मेडिकल तथा डेंटल के छेत्र में आरक्षण को बड़ा दिया गया है।
  • महाराष्ट्र के मराठा, गुजरात के पटेल तथा हरियाणा के जाटों को के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।
  • अब राज्य की सरकार अपने राज्य की जाति के अनुसार सूची बनाने के काम को ओर प्रभावी ढंग से कर सकेगी।

इस बिल से जुड़े कुछ प्रश्नोत्तर (FAQ) –

प्रश्न:- OBC बिल 2021 संविधान का कौन सा संसोधान है?

उत्तर:- 127 वां संविधान संशोधन। 

प्रश्न:- 127 वां संविधान संशोधन कब पारित हुआ?

उत्तर:-  10 अगस्त 2021

प्रश्न:- OBC बिल में क्या ख़ास है?

उत्तर:- इस बिल के अन्तर्गत दोबारा से राज्य को OBC की सूची जारी करने का अधिकार प्राप्त हो गया।

प्रश्न:- OBC बिल किन जातियों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा?

उत्तर:- जो जाति केंद्र सरकार से OBC का दर्जा प्राप्त करने में असफल रहती है। जैसे – हरियाणा के जाट, गुजरात का पटेल समुदाय, महाराष्ट्र के मराठा आदि जातियों को ज्यादा फ़ायदा होगा।

प्रश्न:- OBC बिल को संसद में कुल कितने मत प्राप्त हुए?

उत्तर:- 386 मत। 

प्रश्न:- OBC बिल के आने से शिक्षा के किन छेत्रो में ज्यादा फ़ायदा होगा?

उत्तर:- मेडिकल तथा डेंटल।

प्रश्न:- OBC बिल में संविधान के किस कानून में सुधार किया गया है ?

उत्तर:-102 वे कानून में सुधार किया गया है।

प्रश्न:- OBC बिल किसके द्वारा पास किया गया है ?

उत्तर:- केंद्र सरकार के द्वारा।

प्रश्न:- ओबीसी बिल में संविधान के किन आर्टिकल्स पर संशोधन किया जा रहा है ?

उत्तर:- संविधान के 342A, 338B और 366 आर्टिकल पर संशोधन किया जाएगा।

प्रश्न:- संसद में कितने OBC सांसद हैं ?

उत्तर:- संसद में लगभग 39 % ओबीसी सांसद हैं। 

प्रश्न:- ओबीसी को कितना आरक्षण प्रदान किया गया है ?

उत्तर:- 50%

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